Adhyay 3

Manusmriti

Shloka 86 Chapter Three

Adhyay 3
Shloka 86

Chapter Three

Subject: समावर्तन, विवाह एवं पञ्चयज्ञविधान

286 Shloka
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Adhyay 3 Shloka 86
Shloka
कुह्वै चैवानुमत्यै च प्रजापतय एव च। सह द्यावापृथिव्योश्च तथा स्विष्टकृतेऽन्ततः॥

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Subject
कथन किया है—
Meaning
(च) और (कुह्वै) अमावस्या की अधिष्ठात्री ईश्वरीय शक्ति अर्थात् कृष्णपक्ष को रंचनेवाली परमेश्वर की शक्ति के लिए ['ओं कुह्वै स्वाहा' मन्त्र से ] (च) तथा (अनुमत्यै) पूर्णिमा की अधिष्ठात्री ईश्वरीय शक्ति अर्थात् शुक्लपक्ष का निर्मारण करने वाली परमेश्वर की शक्ति के लिए या परमेश्वर की चितिशक्ति के लिए [' अनुमत्यै स्वाहा' मन्त्र से] (प्रजापतये एव) सब जगत् को उत्पन्न करने वाले परमेश्वर के सामर्थ्य गुण के लिए [ 'ओ प्रजापतये स्वाहा' मन्त्र से] (सहद्यावापृथिव्यो:) ईश्वर दारा उत्पादित लोक और पृथिवी लोक की पुष्टि के लिए ['य़ों सहद्यावापृथिवीभ्यां स्वाहा' मन्त्र से] (तथा अन्ततः) और अन्त में (स्विष्टकृते) अभीष्ट सुखं देने वाले ईश्वर गुण के लिए ['ओं स्विष्टकृते स्वाहा' मन्त्र से] आहुति देवे॥८६॥