Meaning
(आदौ) प्रथम (अग्नेः सोमस्य च एव) अग्नि = पूज्य परमेश्वर और सोम =सव पदार्थों को उत्पन और पुष्ट करके सुख देने वाले सोमरूप परमात्मदेव के लिए [ 'ओम् अग्नये स्वाहा' 'ओ सोमाय स्वाहा' इन मन्त्रों द्वारा] (च) और (तयोः समस्तयोः) उन्हीं देवों के सर्वत्र व्याप्त रूपों के लिए संयुक्त रूप में ['ओम् अग्नीषोमाभ्यां स्वाहा' इस मन्त्र के द्वारा, अग्नि = जो प्रारण अर्थात् सव प्राणियों के जीवन का हेतु है और सोम = जो अपान अर्थात् दुःख के नाश का हेतु है] (च) और (विश्वेभ्य: देवेभ्यः एव) विश्वदेवों = संसार को प्रकाशित या संचालित करनेवाले ईश्वरीय गुणों के लिए [ विश्वेभ्य: देवभ्य: स्वाहा' इस मन्त्र द्वारा ] (च) तथा (धन्वन्तरये एव) धन्वन्तरि = जन्म-मरण आदि के अवसर पर आने वाले रोगों का नाश करने वाले ईश्वर के गुण के लिए [ धन्वन्तरये स्वाहा' इस मन्त्र से] बलिवैश्वदेव यज्ञ में आहुति देवे॥८५॥