Adhyay 3

Manusmriti

Shloka 84 Chapter Three

Adhyay 3
Shloka 84

Chapter Three

Subject: समावर्तन, विवाह एवं पञ्चयज्ञविधान

286 Shloka
3/84
Adhyay 3 Shloka 84
Shloka
वैश्वदेवस्य सिद्धस्य गृह्येऽग्नौ विधिपूर्वकम्। आभ्यः कुर्याद्देवताभ्यो ब्राह्मणो होमं अन्वहम्॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Subject
वलिवैश्वदेव यज्ञ का विधान
Meaning
(ब्राह्मणः) ब्राह्मण एवं द्विज व्यक्ति (गृह्य अग्नी) पाकशाला की शग्नि में (सिद्धस्य वैश्वदेवस्य) सिद्ध = तैयार हुए बलिवैश्वदेव यज्ञ के भाग वाले भोजन का (अन्वहम्) प्रतिदिन (आभ्य: देवताभ्यः होमं कुर्यात्) इन देवताओं के लिये आहुति देकर हवन करे–॥८४॥