Adhyay 3

Manusmriti

Shloka 82 Chapter Three

Adhyay 3
Shloka 82

Chapter Three

Subject: समावर्तन, विवाह एवं पञ्चयज्ञविधान

286 Shloka
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Adhyay 3 Shloka 82
Shloka
कुर्यादहरहः श्राद्धं अन्नाद्येनोदकेन वा। पयोमूलफलैर्वापि पितृभ्यः प्रीतिं आवहन्॥

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Subject
पितृयज्ञ का विधान
Meaning
गृहस्थ व्यक्ति (अन्नाद्येन वा उदकेन अपि वा पयः + मूल + फलैः) ग्रन्न आदि भोज्य पदार्थों से और जल तथा दूध से, कन्दमूल, फल आदि से (पितृभ्यः प्रीतिम् आवहन्) माता-पिता आदि बुजुर्गों से अत्यन्त प्रेम करते हुए (अहः + ग्रहः श्राद्धं कुर्यात्) प्रतिदिन श्राद्ध = श्रद्धा से किये जाने वाले सेवा-सुश्रूषा, भोजन देना आदि कर्त्तव्य करे॥८२॥