Adhyay 3

Manusmriti

Shloka 80 Chapter Three

Adhyay 3
Shloka 80

Chapter Three

Subject: समावर्तन, विवाह एवं पञ्चयज्ञविधान

286 Shloka
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Adhyay 3 Shloka 80
Shloka
ऋषयः पितरो देवा भूतान्यतिथयस्तथा। आशासते कुटुम्बिभ्यस्तेभ्यः कार्यं विजानता॥

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Meaning
(ऋषयः पितरः देवाः भूतानि तथा अतिथयः) ऋषि-मुनि लोग, माता पिता, अग्नि आदि देवता, भृत्य तथा कुष्ठी आदि और अतिथिलोग (कुटुम्बिभ्य: प्रशासते) गृहस्थों से ही आशा रखते हैं अर्थात् सहायता की अपेक्षा रखते हैं (विजानतां तेभ्यः कार्यम्) अपने गृहस्थ सम्बन्धी कत्र्तव्यों को समझने वाले व्यक्ति को चाहिए कि वह इनके लिए सहायता कार्य करे॥८०॥