Adhyay 3

Manusmriti

Shloka 79 Chapter Three

Adhyay 3
Shloka 79

Chapter Three

Subject: समावर्तन, विवाह एवं पञ्चयज्ञविधान

286 Shloka
3/79
Adhyay 3 Shloka 79
Shloka
स संधार्यः प्रयत्नेन स्वर्गं अक्षयं इच्छता। सुखं चेहेच्छतात्यन्तं योऽधार्यो दुर्बलेन्द्रियैः॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे स्त्री-पुरुषो ! जो तुम (अक्षयं स्वर्गम् इच्छता च सुखम् इच्छता) प्रक्षय मुक्ति-सुख और इस संसार के सुख की इच्छा रखते हो तो (यः दुर्बलेन्द्रियैः अधार्य :) जो दुर्बलेन्द्रिय और निर्बुद्धि पुरुषों के धारण करने योग्य नहीं है (सः नित्यं प्रयत्नेन संधार्य:) उस गृहाश्रम को नित्य प्रयत्न से धारण करो॥७९॥