Adhyay 3

Manusmriti

Shloka 77 Chapter Three

Adhyay 3
Shloka 77

Chapter Three

Subject: समावर्तन, विवाह एवं पञ्चयज्ञविधान

286 Shloka
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Adhyay 3 Shloka 77
Shloka
यथा वायुं समाश्रित्य वर्तन्ते सर्वजन्तवः। तथा गृहस्थं आश्रित्य वर्तन्ते सर्व आश्रमाः॥

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1 Bhashyas
Subject
गृहस्थाश्रम की महत्ता
Meaning
(यथा वायुं समाश्रित्य) जैसे वायु के आश्रय से (सर्वजन्तवः वर्तन्ते) सब जीवों का वर्त्तमान सिद्ध होता है (तथा) वैसे ही (गृहस्थमाश्रित्य) गृहस्थ के प्राश्रय से (सर्वे प्राश्रमाः) ब्रह्मचारी, वानप्रस्थ और संन्यासी अर्थात् सब आश्रमों का (वर्त्तन्ते) निर्वाह होता है ॥७७॥