Adhyay 3

Manusmriti

Shloka 76 Chapter Three

Adhyay 3
Shloka 76

Chapter Three

Subject: समावर्तन, विवाह एवं पञ्चयज्ञविधान

286 Shloka
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Adhyay 3 Shloka 76
Shloka
अग्नौ प्रास्ताहुतिः सम्यगादित्यं उपतिष्ठते। आदित्याज्जायते वृष्टिर्वृष्टेरन्नं ततः प्रजाः॥

Bhashya

Meaning
[ वह पालन-पोषण और भला इस प्रकार होता है] (अग्नौ सम्यक् प्रास्ता आहुतिः) अग्नि में अच्छी प्रकार डाली हुई घृत आदि पदार्थों की आहुति (आदित्यम् उपतिष्ठते) सूर्य को प्राप्त होती है सूर्य की किरणों से वातावरण में मिलकर अपना प्रभाव डालती है, फिर (आदित्यात् जायते वृष्टिः) सूर्य से वृष्टि होती है (वृष्टे: अन्नम्) वृष्टि से अन्न पैदा होते हैं (ततः प्रजाः) उससे प्रजाओं का पालन होता है ॥७६॥