Adhyay 3

Manusmriti

Shloka 74 Chapter Three

Adhyay 3
Shloka 74

Chapter Three

Subject: समावर्तन, विवाह एवं पञ्चयज्ञविधान

286 Shloka
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Adhyay 3 Shloka 74
Shloka
जपोऽहुतो हुतो होमः प्रहुतो भौतिको बलिः। ब्राह्म्यं हुतं द्विजाग्र्यार्चा प्राशितं पितृतर्पणम्॥

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Meaning
(अहुत: जपः) 'अहुत' 'जपयज्ञ' अर्थात् 'ब्रह्मयज्ञ' को कहते हैं (हुतः होमः) 'हुत:' होम अर्थात् 'देवयज्ञ' है (प्रहुत: भौतिक: बलि:) 'प्रहुत' भूतों के लिये भोजन का भाग रखना अर्थात् 'भूतयज्ञ' या 'बलिवैश्वदेवयज्ञ' है (ब्राह्मच हुतम्) 'ब्राह्मयहुत' (द्विजाग्रयार्चा) विद्वानों की सेवा करना अर्थात् 'अतिथियज्ञ' है (प्राशितं पितृतर्पणम्) 'प्राशित' माता-पिता आदि का तर्पण = तृप्ति करना 'पितृयज्ञ' है॥७४॥