Adhyay 3

Manusmriti

Shloka 7 Chapter Three

Adhyay 3
Shloka 7

Chapter Three

Subject: समावर्तन, विवाह एवं पञ्चयज्ञविधान

286 Shloka
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Adhyay 3 Shloka 7
Shloka
हीनक्रियं निष्पुरुषं निश्छन्दो रोमशार्शसम्। क्षयामयाव्यपस्मारि श्वित्रिकुष्ठिकुलानि च॥

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Meaning
वे दश कुल ये हैं – (हीनक्रियम्) एक – जिस कुल में उत्तम क्रिया न हो (निष्पुरुषम्) दूसरा- जिस कुल में कोई भी उत्तम पुरुष न हो (निश्छन्द:) तीसरा- जिस 'कुल' में कोई विद्वान् न हो (रोमश + अर्शसम्) चौथा- जिस कुल में शरीर के ऊपर बड़े बड़े लोम हों, पांचवां - जिस कुल में बवासीर (क्षयी) - - छठा – जिस कुल में क्षयी (राजयक्ष्मा) रोग हो (आमयावी) सातवां- जिस कुल में अग्निमन्दता से ग्रामाशय रोग हो (अपस्मारि) ग्राठवां- जिस कुल में मृगी रोग हो (श्वित्रि) नववां – जिस कुल में श्वेतकुष्ठ (च) और (कुष्ठि कुलानि) दशवां – जिस कुल में गलितकुष्ठ आदि रोग हों उन कुलों की कन्या अथवा उन कुलों के पुरुषों से विवाह न करे॥७॥