Adhyay 3

Manusmriti

Shloka 68 Chapter Three

Adhyay 3
Shloka 68

Chapter Three

Subject: समावर्तन, विवाह एवं पञ्चयज्ञविधान

286 Shloka
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Adhyay 3 Shloka 68
Shloka
पञ्च सूना गृहस्थस्य चुल्ली पेषण्युपस्करः। कण्डनी चोदकुम्भश्च बध्यते यास्तु वाहयन्॥

Bhashya

Subject
पञ्चमहायज्ञों के अनुष्ठान का कारण
Meaning
(चुल्ली) चूल्हा (पेषरणी) चक्की (उपस्करः) झाडू (कण्डनी) ओखली (च) तथा (उदकुम्भ:) पानी का घड़ा (गृहस्थस्य पंचसूना:) गृहस्थियों के ये पाँच हिंसा के स्थान हैं (या: तु वाह्यन्) जिनको प्रयोग में लाते हुए गृहस्थी व्यक्ति (बध्यते) हिंसा के पाप से बंध जाता है॥६८॥