Adhyay 3

Manusmriti

Shloka 67 Chapter Three

Adhyay 3
Shloka 67

Chapter Three

Subject: समावर्तन, विवाह एवं पञ्चयज्ञविधान

286 Shloka
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Adhyay 3 Shloka 67
Shloka
वैवाहिकेऽग्नौ कुर्वीत गृह्यं कर्म यथाविधि। पञ्चयज्ञविधानं च पक्तिं चान्वाहिकीं गृही॥

Bhashya

Subject
पञ्चमहायज्ञों-का विधान
Meaning
(गृही) गृहस्थी पुरुष (वैवाहिके अग्नौ) विवाह के बाद प्रज्वलित की जाने वाली अग्नि अर्थात् गार्हस्थ्यरूप अग्नि में (गृह्य कर्म यथाविधि) गृहस्थ के सभी कर्तव्यों को (जैसे सन्तानोत्पत्ति आदि) उचित विधि के अनुसार (कुर्वीत) करे (पञ्चमहायज्ञविधानम्) होम, दैव आदि (३ । ७०) पांचों यज्ञों को (च) तथा (प्रान्वाहिक पक्तिम्) प्रतिदिन का भोजन पकाना ये भी करे॥६७॥