Adhyay 3

Manusmriti

Shloka 60 Chapter Three

Adhyay 3
Shloka 60

Chapter Three

Subject: समावर्तन, विवाह एवं पञ्चयज्ञविधान

286 Shloka
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Adhyay 3 Shloka 60
Shloka
संतुष्टो भार्यया भर्ता भर्त्रा भार्या तथैव च। यस्मिन्नेव कुले नित्यं कल्याणं तत्र वै ध्रुवम्॥

Bhashya

Meaning
हे गृहस्थो ! (यस्मिन् कुले) जिस कुल में (भार्यया भर्त्ता संतुष्टः तथैव भर्त्रा भार्या नित्यम्) भार्या से प्रसन्न पति और पति से भार्या सदा प्रसन्न रहती है (तत्र वै) उसी कुल में (ध्रुवं कल्याणम्) निश्चित कल्याण होता है और दोनों परस्पर अप्रसन्न रहें तो उस कुल में नित्य कलह वास करता है ॥६०॥