Adhyay 3

Manusmriti

Shloka 59 Chapter Three

Adhyay 3
Shloka 59

Chapter Three

Subject: समावर्तन, विवाह एवं पञ्चयज्ञविधान

286 Shloka
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Adhyay 3 Shloka 59
Shloka
तस्मादेताः सदा पूज्या भूषणाच्छादनाशनैः। भूतिकामैर्नरैर्नित्यं सत्करेषूत्सवेषु च॥

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1 Bhashyas
Meaning
(तस्मात्) इस कारण (भूतिकामै : नरैः) ऐश्वर्य की इच्छा करने वाले पुरुषों को योग्य है कि (एताः) इन स्त्रियों को (सत्कारेषु च उत्सवेषु) सत्कार के अवसरों और उत्सवों में (भूषण + आच्छादन+अशनैः) भूषण, वस्त्र, खानपान आदि से (सदा पूज्याः) सदा पूजा अर्थात् सत्कारयुक्त प्रसन्न रखें॥५९॥