Adhyay 3

Manusmriti

Shloka 58 Chapter Three

Adhyay 3
Shloka 58

Chapter Three

Subject: समावर्तन, विवाह एवं पञ्चयज्ञविधान

286 Shloka
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Adhyay 3 Shloka 58
Shloka
जामयो यानि गेहानि शपन्त्यप्रतिपूजिताः। तानि कृत्याहतानीव विनश्यन्ति समन्ततः॥

Bhashya

Meaning
(यानि गेहानि) जिन कुल और घरों में (अप्रतिपूजिता: जामयः) अपूजित अर्थात् सत्कार को न प्राप्त होकर स्त्रीलोग (शपन्ति) जिन गृहस्थों को शाप देती हैं (तानि) वे कुल तथा गृहस्थ (कृत्याहतानि इव) जैसे विष देकर बहुतों को एक बार नाश कर देवें वैसे (समन्ततः विनश्यन्ति) चारों ओर से नष्ट-भ्रष्ट हो जाते हैं॥५८॥(सं० वि० अन्नप्राशन सं०)