Adhyay 3

Manusmriti

Shloka 57 Chapter Three

Adhyay 3
Shloka 57

Chapter Three

Subject: समावर्तन, विवाह एवं पञ्चयज्ञविधान

286 Shloka
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Adhyay 3 Shloka 57
Shloka
शोचन्ति जामयो यत्र विनश्यत्याशु तत्कुलम्। न शोचन्ति तु यत्रैता वर्धते तद्धि सर्वदा॥

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Meaning
(यत्र) जिस कुल में (जामयः) स्त्रियां (शोचन्ति) अपने-अपने पुरुषों के वेश्यागमन, अत्याचार वा व्यभिचार आदि दोषों से शोकातुर रहती हैं (तत्कुलम् प्राशु विनश्यति) वह कुल शीघ्र नाश को प्राप्त हो जाता है (तु) और (यत्र एता: न शोचन्ति) जिस कुल में स्त्रीजन पुरुषों के उत्तम आचरणों से प्रसन्न रहती हैं (तत् हि सर्वदा वर्धते) वह कूल सर्वदा बढ़ता रहता है ।। ५७ ।।