Adhyay 3

Manusmriti

Shloka 56 Chapter Three

Adhyay 3
Shloka 56

Chapter Three

Subject: समावर्तन, विवाह एवं पञ्चयज्ञविधान

286 Shloka
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Adhyay 3 Shloka 56
Shloka
यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः। यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः॥

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Meaning
(यत्र) जिस कुल में (नार्यः तु पूज्यन्ते) नारियों की पूजा अर्थात् सत्कार होता है (तत्र) उस कुल में (देवता:) दिव्यगुण - दिव्य भोग और उत्तम सन्तान (रमन्ते) होते हैं (यत्र) और जिस कुल में (एतास्तु न पूज्यन्ते) स्त्रियों की पूजा नहीं होती है (तत्र सर्वा: अफलाः क्रियाः) वहां जानो उनकी सब क्रिया निष्फल है॥५६॥(सं० वि० गुहाश्रम प्र०) में