Adhyay 3

Manusmriti

Shloka 55 Chapter Three

Adhyay 3
Shloka 55

Chapter Three

Subject: समावर्तन, विवाह एवं पञ्चयज्ञविधान

286 Shloka
3/55
Adhyay 3 Shloka 55
Shloka
पितृभिर्भ्रातृभिश्चैताः पतिभिर्देवरैस्तथा। पूज्या भूषयितव्याश्च बहुकल्याणं ईप्सुभिः॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Subject
स्त्रियों के आदर का विधान तथा उसका फल
Meaning
(पितृभिः भ्रातृभिः पतिभिः तथा देवरैः) पिता, भ्राता, पति और देवर को योग्य है कि (एताः पूज्या: च भूषयितव्याः) अपनी कन्या, बहन, स्त्री और भौजाई आादि स्त्रियों की सदा पूजा करें अर्थात् यथायोग्य मधुरभाषरण, भोजन, चस्त्र, आभूषण आदि से प्रसन्न रक्खें (बहुकल्याणम् ईप्सुभिः) जिन को कल्याण की इच्छा हो वे स्त्रियों को क्लेश कभी न देवें॥५५॥