Adhyay 3

Manusmriti

Shloka 50 Chapter Three

Adhyay 3
Shloka 50

Chapter Three

Subject: समावर्तन, विवाह एवं पञ्चयज्ञविधान

286 Shloka
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Adhyay 3 Shloka 50
Shloka
निन्द्यास्वष्टासु चान्यासु स्त्रियो रात्रिषु वर्जयन्। ब्रह्मचार्येव भवति यत्र तत्राश्रमे वसन्॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Subject
+ (वा पुम् + स्त्रियौ) अथवा लड़का-लड़की का जोड़ा
Meaning
(निन्द्यासु अष्टासु च अन्यासु रात्रिषु) जो पूर्व निन्दित आठ रात्रि कह आये हैं उनमें जो (स्त्रियः वर्जयन्) स्त्री का संग छोड़ देता है (यत्र-तत्र-प्राश्रमे) वसन् वह गृहाश्रम में बसता हुआ भी (ब्रह्मचारी एव भवति) ब्रह्मचारी ही कहाता है॥५०॥