Adhyay 3

Manusmriti

Shloka 5 Chapter Three

Adhyay 3
Shloka 5

Chapter Three

Subject: समावर्तन, विवाह एवं पञ्चयज्ञविधान

286 Shloka
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Adhyay 3 Shloka 5
Shloka
असपिण्डा च या मातुरसगोत्रा च या पितुः। सा प्रशस्ता द्विजातीनां दारकर्मणि मैथुने॥

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Subject
विवाह योग्य कन्या
Meaning
असपिण्डा च या मातुरसगोत्रा च या पितुः | सा प्रशस्ता द्विजातीनां दारकर्मरिण मैथुने॥५॥(५) (या मातु: असपिण्डा) जो स्त्री माता की छह पीढ़ी (च) और (पितुः असगोत्रा) पिता के गोत्र की न हो (सा) वही (द्विजातीनाम्) द्विजों के लिये (दारकर्मणि) विवाह करने में (प्रशस्ता) उत्तम है ॥५॥