Adhyay 3

Manusmriti

Shloka 47 Chapter Three

Adhyay 3
Shloka 47

Chapter Three

Subject: समावर्तन, विवाह एवं पञ्चयज्ञविधान

286 Shloka
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Adhyay 3 Shloka 47
Shloka
तासां आद्याश्चतस्रस्तु निन्दितैकादशी च या। त्रयोदशी च शेषास्तु प्रशस्ता दशरात्रयः॥

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Meaning
(तासाम् श्राद्याः चतस्रः तु निन्दिताः) जैसे प्रथम की चार रात्रि ऋतुदान देने में निन्दित हैं (या एकादशी च त्रयोदशी) वैसे ग्यारहवीं और तेरहवीं रात्रि भी निन्दित है (शेषाः तु दशरात्रयः प्रशस्ताः) और बाकी रहीं दश रात्री, सो ऋतुदान में श्रेष्ठ हैं ॥४७॥