Adhyay 3

Manusmriti

Shloka 42 Chapter Three

Adhyay 3
Shloka 42

Chapter Three

Subject: समावर्तन, विवाह एवं पञ्चयज्ञविधान

286 Shloka
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Adhyay 3 Shloka 42
Shloka
अनिन्दितैः स्त्रीविवाहैरनिन्द्या भवति प्रजा। निन्दितैर्निन्दिता नॄणां तस्मान्निन्द्यान्विवर्जयेत्॥

Bhashya

Meaning
(अनिन्दितैः स्त्रीविवाहैः प्रजा अनिन्द्या भवति) श्रेष्ठ विवाहों से सन्तान भी श्रेष्ठगुण वाली होती है (निन्दितः नृणां निन्दिता) निन्दित विवाहों से मनुष्यों की सन्तानें भी निन्दनीय कर्म करने वाली होती हैं (तस्मात्) इसलिए(निन्द्यान् विवर्जयेत्) निन्दित विवाहों को आचरण में न लावे॥४२॥