Adhyay 3

Manusmriti

Shloka 32 Chapter Three

Adhyay 3
Shloka 32

Chapter Three

Subject: समावर्तन, विवाह एवं पञ्चयज्ञविधान

286 Shloka
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Adhyay 3 Shloka 32
Shloka
इच्छयान्योन्यसंयोगः कन्यायाश्च वरस्य च। गान्धर्वः स तु विज्ञेयो मैथुन्यः कामसंभवः॥

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Meaning
(वरस्य च कन्यायाः) वर और कन्या की (इच्छया अन्योन्य-संयोगः) इच्छा से दोनों का संयोग होना (मैथुन्य:) और अपने मन में यह मान लेना कि हम दोनों स्त्री-पुरुष हैं (कामसंभव:) यह काम से हुआ (सः तु गान्धर्व: विज्ञेयः) वह 'गान्धर्व विवाह' कहाता है ॥३२॥