Adhyay 3

Manusmriti

Shloka 30 Chapter Three

Adhyay 3
Shloka 30

Chapter Three

Subject: समावर्तन, विवाह एवं पञ्चयज्ञविधान

286 Shloka
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Adhyay 3 Shloka 30
Shloka
सहोभौ चरतां धर्मं इति वाचानुभाष्य च। कन्याप्रदानं अभ्यर्च्य प्राजापत्यो विधिः स्मृतः॥

Bhashya

Subject
"वर से कुछ लेके विवाह होना आर्ष"
Meaning
(अभ्यर्च्य) कन्या और वर को, यज्ञशाला में विधि करके (उभौ धर्मं सह चरताम्' इति) सब के सामने 'तुम दोनों मिलके गृहाश्रम के कर्मों को यथावत् करो ऐसा (वाचा - अनुभाष्य) कहकर (कन्याप्रदानम्) दोनों की प्रसन्नता पूर्वक पाणिग्रहण होना (प्राजापत्यः विधिः स्मृतः) वह 'प्राजापत्य विवाह' कहाता है ॥३०॥