Adhyay 3

Manusmriti

Shloka 28 Chapter Three

Adhyay 3
Shloka 28

Chapter Three

Subject: समावर्तन, विवाह एवं पञ्चयज्ञविधान

286 Shloka
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Adhyay 3 Shloka 28
Shloka
यज्ञे तु वितते सम्यगृत्विजे कर्म कुर्वते। अलङ्कृत्य सुतादानं दैवं धर्मं प्रचक्षते॥

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Meaning
(वितते तु यज्ञे) विस्तृत यज्ञ में (सम्यक् ऋत्विजे कर्म कुर्वते) बड़े-बड़े विद्वानों का वरण कर उसमें कर्म करने वाले विद्वान् को (अलंकृत्य सुतादानम्) वस्त्र, आभूषण आदि से कन्या को सुशोभित कर के देना (दैवं धर्म प्रचक्षते) वह 'दैव विवाह'॥२८॥(सं० वि० विवाह संस्कार) * (प्रचक्षते) कहा जाता है।