Adhyay 3

Manusmriti

Shloka 27 Chapter Three

Adhyay 3
Shloka 27

Chapter Three

Subject: समावर्तन, विवाह एवं पञ्चयज्ञविधान

286 Shloka
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Adhyay 3 Shloka 27
Shloka
आच्छाद्य चार्चयित्वा च श्रुतशीलवते स्वयम्। आहूय दानं कन्याया ब्राह्मो धर्मः प्रकीर्तितः॥

Bhashya

Meaning
(श्रुतिशीलवते, अर्चयित्वा) कन्या के योग्य सुशील, विद्वान् पुरुष का सत्कार कर के (आच्छाद्य) कन्या को वस्त्रादि से अलंकृत करके (स्वयम् आहूय) उत्तम पुरुष को बुला अर्थात् जिसको कन्या ने प्रसन्न भी किया हो (कन्यायाः दानम्) उसको कन्या देना (ब्राह्मः धर्मः प्रकीर्तितः) वह 'ब्राह्म विवाह' कहाता है ॥२७॥