Adhyay 3

Manusmriti

Shloka 118 Chapter Three

Adhyay 3
Shloka 118

Chapter Three

Subject: समावर्तन, विवाह एवं पञ्चयज्ञविधान

286 Shloka
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Adhyay 3 Shloka 118
Shloka
अघं स केवलं भुङ्क्ते यः पचत्यात्मकारणात्। यज्ञशिष्टाशनं ह्येतत्सतां अन्नं विधीयते॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(य: केवलम् आत्मकारणात् पंचति) जो व्यक्ति केवल अपना पेट भरने के लिए ही भोजन पकाता है (सः) वह (ग्रघं भुङ्क्ते). केवल पाप को खाता है अर्थात् इस प्रवृत्ति से स्वार्थ आदि पापभावना ही बढ़ती है (एतत्) यह उपर्युक्त (यज्ञशिष्ट + प्रशनं हि) यज्ञों से शेष भोजन ही (सताम् अन्नं विधीयते) सज्जनों का अन्न माना गया है ॥११८॥