Adhyay 3

Manusmriti

Shloka 116 Chapter Three

Adhyay 3
Shloka 116

Chapter Three

Subject: समावर्तन, विवाह एवं पञ्चयज्ञविधान

286 Shloka
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Adhyay 3 Shloka 116
Shloka
भुक्तवत्स्वथ विप्रेषु स्वेषु भृत्येषु चैव हि। भुञ्जीयातां ततः पश्चादवशिष्टं तु दम्पती॥

Bhashya

Subject
गृहस्थ दम्पती को सबके बाद भोजन करना और यज्ञशेष भोजन करना
Meaning
(अथ विप्रेषु भुक्तवत्सु) विद्वान् अतिथियों द्वारा भीजन कर लेने पर (च) और (स्वेषु भृत्येषु एव हि) अपने सेवकों आदि के खा लेने पर (ततः पश्चात्) उसके बाद (अवशिष्टम् तु) शेष बचे भोजन को (दम्पती भुञ्जीयाताम्) पतिपत्नी खायें ॥११६॥