Adhyay 3

Manusmriti

Shloka 108 Chapter Three

Adhyay 3
Shloka 108

Chapter Three

Subject: समावर्तन, विवाह एवं पञ्चयज्ञविधान

286 Shloka
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Adhyay 3 Shloka 108
Shloka
वैश्वदेवे तु निर्वृत्ते यद्यन्योऽतिथिराव्रजेत्। तस्याप्यन्नं यथाशक्ति प्रदद्यान्न बलिं हरेत्॥

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1 Bhashyas
Meaning
(वैश्वदेवे तु निर्वृत्ते) वैश्वदेव यज्ञ के समाप्त होने पर अर्थात् भोजन बनने और उसकी यज्ञ में आहुतियां दे देने के पश्चात् भी (यत् अन्यः अतिथिः आव्रजेत्) यदि कोई और अतिथि आ जाये तो (तस्य अपि यथाशक्ति अन्नं प्रदद्यात्) उसको भी यथाशक्ति भोजन कराये (बलिन हरेत्) दुवारा भोजन बनाने के बाद बलिभाग नहीं निकाले॥१०८॥