Adhyay 3

Manusmriti

Shloka 107 Chapter Three

Adhyay 3
Shloka 107

Chapter Three

Subject: समावर्तन, विवाह एवं पञ्चयज्ञविधान

286 Shloka
3/107
Adhyay 3 Shloka 107
Shloka
आसनावसथौ शय्यां अनुव्रज्यां उपासनाम्। उत्तमेषूत्तमं कुर्याद्धीने हीनं समे समम्॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
जब गृहस्थ के समीप अतिथि आवें तब (आसन + आवसथौ) आसन, निवास (शय्याम् अनुव्रज्याम् उपासनाम) शय्या, पश्चात्गमन और समीप में बैठना आदि सत्कार जैसे का वैसा अर्थात् (उत्तमेषु उत्तमं, समे समं, हीने हीनं कुर्यात्) उत्तम का उत्तम, मध्यम का मध्यम और निकृष्ट का निकृष्ट करे, ऐसा न हो कि कभी न समझें॥१०७॥