Adhyay 3

Manusmriti

Shloka 106 Chapter Three

Adhyay 3
Shloka 106

Chapter Three

Subject: समावर्तन, विवाह एवं पञ्चयज्ञविधान

286 Shloka
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Adhyay 3 Shloka 106
Shloka
न वै स्वयं तदश्नीयादतिथिं यन्न भोजयेत्। धन्यं यशस्यं आयुष्यं स्वर्ग्यं वातिथिपूजनम्॥

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1 Bhashyas
Meaning
(यत् अतिथि न भोजयेत्) जिस पदार्थ को अतिथि को नहीं खिलावे (तत् वै स्वयं न प्रश्नोयात्) उसे स्वयं भी न खावे, अभिप्राय यह है कि जैसा स्वयं भोजन करे वैसा ही अतिथि को भी दे (अतिथिपूजनम्) अतिथि का सत्कार करना (धन्यं यशस्यम् आयुष्यं वा स्वर्ग्यम्) धन, यश, आयु और सुख को देने और बढ़ाने वाला है॥१०६॥