Adhyay 3

Manusmriti

Shloka 105 Chapter Three

Adhyay 3
Shloka 105

Chapter Three

Subject: समावर्तन, विवाह एवं पञ्चयज्ञविधान

286 Shloka
3/105
Adhyay 3 Shloka 105
Shloka
अप्रणोद्योऽतिथिः सायं सूर्योढो गृहमेधिना। काले प्राप्तस्त्वकाले वा नास्यानश्नन्गृहे वसेत्॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(गृहमेधिना) गृहस्थी को चाहिए कि (सायं सूर्योढ: अतिथि: अप्रणोद्यः) सायंकाल सूर्य ग्रस्त होते देख आये हुए अतिथि को वापिस न लौटाये, और (काले प्राप्तः वा अकाले) चाहे समय पर आये अथवा असमय पर (अस्य गृहे अनश्नन् न वसेत्) इस गृहस्थी के घर में कोई अतिथि बिना भोजन के नहीं रहे ॥१०५॥