Adhyay 3

Manusmriti

Shloka 104 Chapter Three

Adhyay 3
Shloka 104

Chapter Three

Subject: समावर्तन, विवाह एवं पञ्चयज्ञविधान

286 Shloka
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Adhyay 3 Shloka 104
Shloka
उपासते ये गृहस्थाः परपाकं अबुद्धयः। तेन ते प्रेत्य पशुतां व्रजन्त्यन्नादिदायिनः॥

Bhashya

Meaning
(ये गृहस्था:) यदि गृहस्थ होके (परपाकम् उपासते) पराये घर में भोजनादि की इच्छा करते हैं तो (ते अवुद्धयः तेन) वे बुद्धिहीन गृहस्थ अन्य से प्रतिग्रह रूप पाप करके (प्रेत्य) जन्मान्तर में (अन्नादिदायिनां पशुतां व्रजन्ति) अन्नादि के दाताओं के पशु बनते हैं क्योंकि अन्य से अन्न आदि का ग्रहण करना अतिथियों का काम है, गृहस्थों का नहीं॥१०४॥