Adhyay 3

Manusmriti

Shloka 102 Chapter Three

Adhyay 3
Shloka 102

Chapter Three

Subject: समावर्तन, विवाह एवं पञ्चयज्ञविधान

286 Shloka
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Adhyay 3 Shloka 102
Shloka
एकरात्रं तु निवसन्नतिथिर्ब्राह्मणः स्मृतः। अनित्यं हि स्थितो यस्मात्तस्मादतिथिरुच्यते॥

Bhashya

Subject
प्रतिथि का लक्षण
Meaning
(ब्राह्मण:) विद्वान् व्यक्ति (एकारात्रं तु निवसन्) जो एक ही रात्रि तक पराये घर में रहे तो उसे (अतिथिः स्मृतः) अतिथि कहा गया है (यस्मात् हि अनित्यं स्थितः) क्योंकि जिस कारण से वह नित्य नहीं ठहरता है अथवा जिसका आना अनिश्चित होता है इसी कारण से उसे (अतिथि: उच्यते) अतिथि कहा जाता है ॥१०२॥