Adhyay 3

Manusmriti

Shloka 10 Chapter Three

Adhyay 3
Shloka 10

Chapter Three

Subject: समावर्तन, विवाह एवं पञ्चयज्ञविधान

286 Shloka
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Adhyay 3 Shloka 10
Shloka
अव्यङ्गाङ्गीं सौम्यनाम्नीं हंसवारणगामिनीम्। तनुलोमकेशदशनां मृद्वङ्गीं उद्वहेत्स्त्रियम्॥

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1 Bhashyas
Subject
विवाहयोग्य कन्या
Meaning
(अव्यङ्ग + अङ्गीम्) जिसके सरल सूत्रे अंग हों, विरुद्ध नहीं (सौम्यनाम्नीम्) जिसका नाम सुन्दर अर्थात् यशोदा, सुखदा आदि हो (हंस-वारण-गामिनीम्) हंस और हथिनी के तुल्य जिसकी चाल हो (तनु-लोम-केश दशनाम्) सूक्ष्म लोम, केश, और दाँत युक्त (मृदु + अङ्गीम्) जिसके सब अङ्ग कोमल हों, वैसी (स्त्रियम् उद्वहेत्) स्त्री के साथ विवाह करना चाहिए ॥१०॥