Adhyay 3

Manusmriti

Shloka 1 Chapter Three

Adhyay 3
Shloka 1

Chapter Three

Subject: समावर्तन, विवाह एवं पञ्चयज्ञविधान

286 Shloka
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Adhyay 3 Shloka 1
Shloka
षट्त्रिंशदाब्दिकं चर्यं गुरौ त्रैवेदिकं व्रतम्। तदर्धिकं पादिकं वा ग्रहणान्तिकं एव वा॥

Bhashya

Subject
समावर्त्तन काल
Meaning
(गुरी) गुरु के समीप रहते हुए ब्रह्मचारी को (त्रैवेदिकं व्रतम) ज्ञान, कर्म, उपासना रूप त्रिविध ज्ञानवाले वेदों के अध्ययन सम्बन्धी ब्रह्मचर्य व्रत का (षट्त्रिंशद्+आब्दिकम्) छत्तीस वर्ष पर्यन्त (तत् + अधिकम्) उससे आधे अर्थात् अठारह वर्ष पर्यन्त (वा) अथवा (पादिकम्) उन छत्तीस के चौथे भाग अर्थात् नौ वर्ष पर्यन्त (वा) अथवा (ग्रहण + अन्तिकं एव) जब तक विद्या पूरी न हो जाये तब तक (चर्यम्) पालन करना चाहिये॥१॥