Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 99 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 99

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
2/99
Adhyay 2 Shloka 99
Shloka
भोःशब्दं कीर्तयेदन्ते स्वस्य नाम्नोऽभिवादने। नाम्नां स्वरूपभावो हि भोभाव ऋषिभिः स्मृतः॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
[२|९७ में विहित प्रक्रिया पूरी होने के बाद फिर ] (अभिवादने) अभिवादन में (स्वस्य नाम्न: अन्ते) अपना नाम बताने के पश्चात् ('भो:' शब्दं कीर्तयेत्) 'भो:' यह शब्द लगाये (हि) क्योंकि (ऋषिभिः) ऋषियों ने (भोभाव: नाम्नां स्वरूपभावः स्मृतः) 'भो:' के अभिप्राय को नामों के स्वरूप का द्योतक ही माना है अर्थात् 'भो:' संबोधन के उच्चारण से ही नाम का अन्तर्भाव स्वतः हो जाता है। जैसे—अभिवादये ग्रहं देवदत्तः 'भोः'॥१६॥