Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 96 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 96

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 96
Shloka
अभिवादनशीलस्य नित्यं वृद्धोपसेविनः। चत्वारि तस्य वर्धन्ते आयुर्धर्मो यशो बलम्॥

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Subject
अभिवादन का फल
Meaning
अभिवादनशीलस्य नित्यं वृद्धोपसे विनः । चत्वारि तस्य वर्धन्ते आयुर्विद्यायशो बलम्॥१६॥[१२१] (७४) (अभिवादनशीलस्य) अभिवादन करने का जिसका स्वभाव और (नित्यं वृद्धोपसेविनः) विद्या वा अवस्था में वृद्ध पुरुषों का जो नित्य सेवन करता है (तस्य आयुः विद्या यश: बलं चत्वारि वर्धन्ते) उसकी आयु, विद्या, कीत्ति और बल, इन चारों की नित्य उन्नति हुआ करती है॥१६॥