Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 95 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 95

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

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Adhyay 2 Shloka 95
Shloka
ऊर्ध्वं प्राणा ह्युत्क्रामन्ति यूनः स्थविर आयति। प्रत्युत्थानाभिवादाभ्यां पुनस्तान्प्रतिपद्यते॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(स्थविरे, आयति) विद्या, पद, आयु आदि में बड़ों के आने पर (यूनः प्रारणाः) छोटों के प्राण (उत्क्रामन्ति) ऊपर को उभरते-से लगते हैं अर्थात् प्राणों में घबराहट-सी उत्पन्न होने लगती है (हि) किन्तु (प्रत्युत्थाय - अभिवादाभ्याम्) उठने और नमस्कार करने से (पुनः) फिर से (तान् प्रतिपद्यते) शिष्य प्राणों की सामान्य- स्वाभाविक स्थिति को प्राप्त कर लेता है अर्थात् प्राणों की घबराहट और उभराव दूर हो जाते हैं ॥९५॥