Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 90 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 90

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 90
Shloka
यं एव तु शुचिं विद्यान्नियतब्रह्मचारिणम्। तस्मै मां ब्रूहि विप्राय निधिपायाप्रमादिने॥

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1 Bhashyas
Meaning
(यम् एव तु शुचि नियतब्रह्मचारिणम्) जिसे तुम छल-कपट रहित शुद्ध श्रद्धाभाव से युक्त, जितेन्द्रिय और ब्रह्मचारी (विद्यात्) समझो (तस्मै अप्रमादिने निधिपाय विप्राय मां ब्रूहि) उस आलस्यरहित और इस खजाने की रक्षा एवं वृद्धि करने में समर्थ विप्र वेदभक्त जिज्ञासु शिष्य को मुझे पढ़ाना ॥९०॥