Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 89 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 89

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 89
Shloka
विद्या ब्राह्मणं एत्याह शेवधिस्तेऽस्मि रक्ष माम्। असूयकाय मां मादास्तथा स्यां वीर्यवत्तमा॥

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1 Bhashyas
Subject
विद्यादाता ब्राह्मण का कर्त्तव्य
Meaning
[एक आख्यान प्रचलित है कि एक बार] (विद्या ब्राह्मरणम् एत्य) विद्या विद्वान् ब्राह्मण के पास आकर बोली- (ते शेवधिः अस्मि, माम् रक्ष) मैं तेरा खजाना हूँ, तू मेरी रक्षा कर (माम् असूयकाय मा दाः) मुझे मेरी उपेक्षा, निन्दा या द्वेष करने वाले को मत प्रदान कर (तथा वीर्यवत्तमा स्याम्) इस प्रकार से ही मैं वीर्यवती= महत्त्वपूर्ण और शक्तिसम्पन्न वन सकूंगी॥८९॥