Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 84 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 84

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 84
Shloka
आचार्यपुत्रः शुश्रूषुर्ज्ञानदो धार्मिकः शुचिः। आप्तः शक्तोऽर्थदः साधुः स्वोऽध्याप्या दश धर्मतः॥

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Subject
पढ़ाने योग्य शिष्य
Meaning
(आचार्यपुत्रः) अपने आचार्य [गुरु] का पुत्र (शुश्रूषुः) सेवा करने वाला (ज्ञानद:) किसी विषय के ज्ञान का देने वाला (धार्मिक:) धर्मनिष्ठव्यक्ति (शुचि:) छल-कपट रहित (ग्राप्तः) घनिष्ठ व्यक्ति (शक्तः) विद्याग्रहण करने में समर्थ अर्थात् बुद्धिमान् पात्र (अर्थद:) धन देने वाला (साधुः) हितैषी (स्व:) अपने परिवार या सम्बन्ध का (दश धर्मतः अध्याप्याः) ये दश धर्म से अवश्य पढ़ाने योग्य हैं॥८४॥