Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 81 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 81

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
2/81
Adhyay 2 Shloka 81
Shloka
नैत्यके नास्त्यनध्यायो ब्रह्मसत्त्रं हि तत्स्मृतम्। ब्रह्माहुतिहुतं पुण्यं अनध्यायवषट्कृतम्॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(नैत्यके अनध्यायः न अस्ति) नित्यकर्म में अनध्याय नहीं होता जैसे श्वासप्रश्वास सदा लिये जाते हैं, बन्ध नहीं किये जाते, वैसे नित्यकर्म प्रतिदिन करना चाहिये, न किसी दिन छोड़ना (हि) क्योंकि (अनध्यायवषट्कृतं ब्रह्माहुतिहुतं पुण्यम्) अनध्याय में भी अग्निहोत्रादि उत्तमकर्म किया हुआ पुण्यरूप होता है । * (तत् ब्रह्मसत्रं स्मृतम्) उसे ब्रह्मयज्ञ माना गया है । पुण्यमनध्यायवषट्कृतम्॥८१॥