Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 76 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 76

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 76
Shloka
पूर्वां संध्यां जपांस्तिष्ठेत्सावित्रीं आर्कदर्शनात्। पश्चिमां तु समासीनः सम्यगृक्षविभावनात्॥

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1 Bhashyas
Subject
संन्ध्योपासन-समय
Meaning
(आर्कदर्शनात् पूर्वां संध्याम्) दो घड़ी रात्रि से लेके सूर्योदय पर्यन्त प्रातः संध्या (सम्यक् ऋक्षविभावनात् तु पश्चिमाम्) सूर्यास्त से लेकर [ अच्छी प्रकार ] तारों के दर्शन पर्यन्त सायंकाल में [ (समासोन:) भलीभांति स्थित होकर ] (सावित्रीं जपन् तिष्ठेत्) सविता अर्थात् सब जगत् की उत्पत्ति करने वाले परमेश्वर की उपासना गायत्र्यादि मन्त्रों के अर्थविचारपूर्वक नित्य करें॥७६॥(द० ल० पं० पृ० २३६)