Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 72 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 72

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
2/72
Adhyay 2 Shloka 72
Shloka
वेदास्त्यागश्च यज्ञाश्च नियमाश्च तपांसि च। न विप्रदुष्टभावस्य सिद्धिं गच्छति कर्हि चित्॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Subject
विषयी व्यक्ति की असिद्धि
Meaning
(विप्रदुष्टभावस्य) जो अजितेन्द्रिय दुष्टाचारी पुरुष है, उस पुरुष के (वेदाः त्यागाः यज्ञाः नियमाः तपांसि) वेद पढ़ना, त्याग करना, (= संन्यास) लेना, यज्ञ (=अग्निहोत्रादि) करना, नियम (ब्रह्मचर्याश्रम) आदि करना, तप (= निन्दा - स्तुति, और हानि-लाभ आदि द्वन्द्व का सहन) करना आदि कर्म (कहिचित्) कदापि (सिद्धिं न गच्छन्ति) सिद्ध नहीं हो सकते॥७२॥