Meaning
[अथवा] (ब्राह्मणस्य शर्मवद् स्यात्) ब्राह्मण का नाम शर्मंवत् = कल्यारण, शुभ, सौभाग्य, सुख, प्रानन्द, प्रसन्नता भाव वाले शब्दों को जोड़कर रखना चाहिए। जैसे- देवशर्मा, विश्वामित्र, वेदव्रत, धर्मंदत्त, आदि (राज्ञः रक्षासमन्वितम्) क्षत्रिय का नाम रक्षक भाव वाले शब्दों को जोड़कर रखना चाहिए [जैसे—महीपाल, धनञ्जय, धृतराष्ट्र, देववर्मा, कृतवर्मा] (वैश्यस्य पुष्टिसंयुक्तम्) वैश्य का नाम पुष्टि-समृद्धि द्योतक शब्दों को जोड़कर [जैसे— धनगुप्त, धनपाल, वसुदेव, रत्नदेव, वसुगुप्त ] और (शूद्रस्य) शूद्र का नाम (प्रेष्यसंयुतम्) सेवकत्व भाववाले शब्दों को जोड़कर रखना चाहिए [जैसेदेवदास, धर्मंदास, महीदास] ।अर्थात् व्यक्तियों के वर्णगत कार्यों के आधार पर नामकरण करना चाहिए॥७॥