Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 67 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 67

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
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Adhyay 2 Shloka 67
Shloka
एकादशं मनो ज्ञेयं स्वगुणेनोभयात्मकम्। यस्मिन्जिते जितावेतौ भवतः पञ्चकौ गणौ॥

Bhashya

Meaning
(एकादशं मनः) ग्यारहवां मन है + (स्वगुणेन उभयात्मकम्) वह अपने स्तुति आदि गुणों से दोनों प्रकार के इन्द्रियों से सम्बन्ध करता है (यस्मिन् जिते) जिस मन के जीतने में (एतौ) ज्ञानेन्द्रिय तथा कर्मेन्द्रिय दोनों (जितौ) जीत लिये जाते हैं॥६७॥