Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 66 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 66

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

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Adhyay 2 Shloka 66
Shloka
बुद्धीन्द्रियाणि पञ्चैषां श्रोत्रादीन्यनुपूर्वशः। कर्मेन्द्रियाणि पञ्चैषां पाय्वादीनि प्रचक्षते॥

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1 Bhashyas
Meaning
(एषाम्) इनमें (श्रोत्रादीनि पञ्च बुद्धीन्द्रियाणि) कान आदि पांच ज्ञानेन्द्रिय और (पायु-आदीनि पञ्च कर्मेन्द्रियाणि) गुदा आदि पांच कर्मेन्द्रिय, (प्रचक्षते) कहाती हैं। ६६ ।। (सं० वि० वेदारम्भ संस्कार)