Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 65 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 65

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

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Adhyay 2 Shloka 65
Shloka
श्रोत्रं त्वक्चक्षुषी जिह्वा नासिका चैव पञ्चमी। पायूपस्थं हस्तपादं वाक्चैव दशमी स्मृता॥

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1 Bhashyas
Meaning
(श्रोत्रं त्वक् चक्षुषी जिह्वा) कान, त्वचा, नेत्र, जीभ [(च) और (पञ्चमी) पांचवीं] (नासिका) नासिका [=नाक] (पायु-उपस्थं हस्त-पादम्) गुदा, उपस्थ (==मूत्र का मार्ग) हाथ, पग (वाक्) वाणी (दशमी स्मृता) ये दश इन्द्रिय इस शरीर में हैं ।। ६५ ।।