Adhyay 2

Manusmriti

Shloka 63 Chapter Two

Adhyay 2
Shloka 63

Chapter Two

Subject: संस्कार एवं ब्रह्मचर्याश्रम-विषय

224 Shloka
2/63
Adhyay 2 Shloka 63
Shloka
इन्द्रियाणां विचरतां विषयेष्वपहारिषु। संयमे यत्नं आतिष्ठेद्विद्वान्यन्तेव वाजिनाम्॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Subject
इन्द्रिय संयम का विधान
Meaning
(विद्वान् यन्ता वाजिनाम् इव) जैसे विद्वान् सारथि घोड़ों को नियम में रखता है वैसे (विषयेषु अपहारिषु) मन और आत्मा को खोटे कामों में खेंचने वाले विषयों में (विचरताम्) विचरती हुई (इन्द्रियाणां संयमे) इन्द्रियों के निग्रह में (यत्नम्) प्रयत्न (आतिष्ठेत्) सब प्रकार से करे || ६३||